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राज्य

उत्तराखंड: केदारघाटी के लोग बढ़ती मुस्लिम आबादी से चिंतित, नहीं बेचेंगे अपनी जमीन

WebdeskAug 27, 2021, 12:00 AM IST

उत्तराखंड: केदारघाटी के लोग बढ़ती मुस्लिम आबादी से चिंतित, नहीं बेचेंगे अपनी जमीन


उत्तराखंड के चार मैदानी जिलों में मुस्लिम आबादी पिछले 20 सालों में 15 से बढ़ कर 35 फीसदी हो गयी है। धीरे—धीरे पहाड़ के जिलों में भी मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है, जिसके बाद से पहाड़ों में अपराध और लव जिहाद जैसी वारदातें भी बढ़ रही हैं



दिनेश मानसेरा

उत्तराखंड में बढ़ती मुस्लिम आबादी की खबरों के बीच रुद्रप्रयाग जिले के कई गांव वालों ने यह तय किया है कि वे अपने गांव की ज़मीन किसी मुस्लिम को नही बेचेंगे। यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि देवभूमि का स्वरूप यथावत बना रहे।

आए दिन देश—दुनिया में जिहादियों द्वारा जारी बर्बरता, राज्य में होने वाले अपराधों में उनकी संलिप्तता, अवैध अतिक्रमण और अराजकता को देखते हुए, भविष्य में इस तरह की कोई घटना न घटने पाए, इसके चलते यह निर्णय लिया गया है।

गुप्तकाशी, ह्यून, नारायण कोटी, देव शाल आदि गांव के लोगों ने मुस्लिम समुदाय का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। राज्य के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश उनियाल कहते हैं कि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी का बढ़ना हिंदुत्व के लिए खतरा है। कश्मीर में हिंदुओं के साथ 90 के दशक में क्या हुआ, यह देश—दुनिया ने देखा है। अब भी इस्लामिक आतंकी राज्य में शांति भंग में लगे हुए हैं। क्योंकि वहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। जिहादियों को शरण देने वालों की कमी नहीं है। धीरे—धीरे इसी पैर्टन पर मुस्लिम देश के दूसरे राज्यों में भी बढ़ते जा रहे हैं। पहले तो किसी वे इन जगहों पर बसते हैं, फिर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इसलिए इस तरह के आपराधिक तत्वों को बहिष्कार करना चाहिए। हम सब केदारघाटी में स्थानीय स्तर पर पूर्णरूप से बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे गांव में अब ऐसे लोगों को भूमि बेचना या मकान बेचना पाप की श्रेणी में माना जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता जीतेन्द्र सिंह ने बताते हैं कि यह लोग यहां आकर फल—सब्जी, फेरी, कबाड़ी मकान—मजदूरी, नाई, बढ़ई आदि का धंधा कर सीधे—सरल पहाड़ी हिंदुओं का विश्वास जीत लेते हैं। बाद में लव जिहाद जैसी वारदाते करते हैं। वर्तमान में जो हालात हैं, अगर यही हाल रहा तो आगामी कुछ वर्षों में मुस्लिम आबादी पहाड़ों पर बढ़ती ही जाएगी। इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे मजदूरों पर आमजन से लेकर सरकार पैनी नजर रखें।

बहरहाल, राज्य के कुछ गांव के सामाजिक संगठन इस कोशिश में भी लगे हैं कि दैनिक मजदूरी के कामों के लिए स्थानीय युवाओं को प्रक्षिशित किया जाए। उन्हें समझाया जाएगा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

उल्लेखनीय है उत्तराखंड के चार मैदानी जिलों में मुस्लिम आबादी पिछले 20 सालों में 15 से बढ़ कर 35 फीसदी हो गयी है। धीरे धीरे पहाड़ के जिलों में भी मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है। जिसके बाद से पहाड़ों में अपराध और लव जिहाद जैसी वारदातें भी बढ़ रही हैं।

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