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ज्ञान की 'गंगा' गया में लोगों को ईसाई बनाने के लिए फैलाया जा रहा है अंधविश्वास

WebdeskAug 23, 2021, 01:35 PM IST

ज्ञान की 'गंगा' गया में लोगों को ईसाई बनाने के लिए फैलाया जा रहा है अंधविश्वास

 

जिस गया में मिले ज्ञान से महात्मा बुद्ध ने पूरे विश्व को अंधविश्वास एवं चमत्कार से दूर रहने की शिक्षा दी; आज उसी गया में ईसाई मिशनरियां अंधविश्वास का सहारा लेकर भोले-भाले हिन्दुओं को कर रही हैं कन्वर्ट


 

संजीव कुमार

गया अंतरराष्ट्रीय महत्व का शहर है। विश्व के सनातनी एवं बौद्ध मत के लोगों के लिए यह नगर बहुत महत्व रखता है। लेकिन इन दिनों गया शहर और गया जिले में ईसाई मिशनरियां हिन्दुओं को कन्वर्ट करने में लगी हैं। प्राय: प्रतिदिन गया जिले के किसी न किसी हिस्से से कन्वर्ट की घटनाएं सामने आती हैं। यह सब प्रार्थना सभा एवं उपचार की आड़ में हो रहा है।


19 अगस्त को बोधगया के भागलपुर गांव में कन्वर्ट की जो घटना हुई है, वह बहुत ही चिंताजनक है। यहां के एक सभागार में दर्जनों ऐसी महिलाएं मिलीं, जो अपना या फिर अपने किसी नजदीकी का उपचार कराने आयी थीं। जब इसकी सूचना हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को हुई तो उन्होंने बोधगया थाने में इस षड्यंत्र की जानकारी दी। बोधगया थाने की पुलिस जब भागलपुर गांव में पहुंची तो वह दंग रह गई। गांव के अंदर एक विशाल सभागार बना हुआ है। इसी में प्रार्थना सभा चलती है। एक छोटे गांव में विशाल सभागार का होना ही बहुत कुछ कह देता है।  प्रार्थना सभा में शामिल महिलाओं से जब पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि वे यहां अपना या अपने बच्चे का इलाज कराने आई हैं। बातचीत से लगा कि मिशनरी वालों ने लोगों के मन में बहुत अच्छी तरह यह बात बैठा दी है कि प्रार्थना सभा में आने से बीमारी ठीक हो जाएगी। प्रार्थना सभा के बाद उन्हें ‘सच्चे ईश्वर’ के मार्ग पर चलने को बताया जाता है।


जो तरीका भागलपुर गांव में अपनाया जा रहा है, उसी तरीके से गया जिले के अन्य क्षेत्रों में भी कन्वर्जन कराया जा रहा है। एक महीने पहले गया शहर के नगर प्रखंड स्थित नैली पंचायत के बेलवाडीह गांव में करीब 25 हिन्दू परिवारों ने ईसाई मत अपना लिया था। ये सभी महादलित समुदाय से थे। अनेक लोगों ने बताया कि मिशनरी वाले सबसे पहले  दलित एवं महादलित बस्तियों में रहने वाले लोगों पर डोरा डालते हैं।   उनका पहला प्रयास होता गांव में किसी तरह प्रार्थना सभा आयोजित करना। भागलपुर गांव में भी यही हुआ। कुछ दिन पहले इस बस्ती की महिला केवला देवी के बेटे की तबियत खराब हुई थी। जैसे ही इसकी जानकारी मिशनरी के लोगों को हुई तो वे केवला देवी के घर पहुंचे। कहा जाता है कि उन लोगों ने बच्चे के लिए प्रार्थना की, पानी दिया और कहा कि वह ठीक हो गया। इसके साथ ही उसे कुछ पैसे भी दिए। इसके बाद केवला देवी यह भूल गई कि उसका बच्चा ठीक हुआ या नहीं, लेकिन पैसे के कारण वह भी कन्वर्जन के कार्य में जुट गयी।
इसके बाद केवला देवी के प्रकरण को सामने रख ईसाइयों ने लगातार प्रार्थना सभा आयोजित की और एक माह पूर्व 50 परिवारों को ईसाई बना दिया। इस घटना की जानकारी जब हिन्दू संगठनों को हुई तो उन लोगों ने अभियान चलाकर उनकी घरवापसी कराई। इसी पंचायत के दुबहल गांव के महादलित टोला सहित डोभी प्रखंड में भी मिशनरियों ने यही कार्य किया।


गया में ईसाई मिशनरियों द्वारा कन्वर्जन का खेल बहुत दिनों से खेला जा रहा है। पूर्व सांसद रामजी की बात मानें तो गया में बीत दो साल में आधा दर्जन से अधिक गांवों में कन्वर्जन के मामले सामने आए हैं। डोभी से लेकर बाराचट्टी तक कई गांवों में दर्जनों हिन्दू परिवारों ने ईसाई मत को अपनाया है। टेकारी के केवरा, मुफस्सिल के दोहारी अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक में कई परिवारों को कन्वर्ट किया गया है। इन गांवों के नाम भले ही अलग-अलग हों, ईसाई मत अपनाने वाले लोग भी भिन्न-भिन्न हैं, उन्हें कन्वर्ट करने का समय भी अलग-अलग है, लेकिन, इनमें ईसाई मिशनरियों द्वारा अपनाया गया तरीका एक ही है। कन्वर्जन के पीछे सबसे बड़ा कारण अंधविश्वास एवं प्रलोभन दिखता है।


हिन्दू जागरण मंच के प्रमुख कार्यकर्ता सुरेन्द्र कहते हैं कि कन्वर्ट करने वाले बहुत ही शातिर हैं। वे लोग चुपके—चुपके गरीब हिन्दुओं को कन्वर्ट करने में सफल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सामने वैसे लोग दिखते हैं जो उसी समाज के होते हैं और जो किसी न किसी कारण से पहले ही कन्वर्ट हो चुके होते हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों को मासिक आर्थिक मदद मिलती है। सबसे पहले गांव के किसी एक व्यक्ति या परिवार को चिह्नित कर कन्वर्ट किया जाता है। उस परिवार की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव को देखकर बाकी परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित किया जाता है। उन्हें बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य का झांसा भी दिया जाता है। सामने से भले ही यह दिखता है कि किसी ने लालच या जबरदस्ती ईसाई मत नहीं अपनाया है,लेकिन उसके पीछे एक षड्यंत्र होता है। कन्वर्ट हो चुकी महिलाएं बिना सिंदूर प्रार्थना सभाओं में जाती हैं। पुरूषों को भी हिन्दू प्रतीकों को हटाने की बात कही जाती है।


विश्व हिन्दू परिषद् के प्रदेश मंत्री परशुराम कुमार कहते हैं कि कन्वर्ट के कार्य में लगे लोगों की गहनता के साथ जांच होनी चाहिए।

 

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