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विश्व

फिर उजागर हुआ पाकिस्तान का जिहादी चेहरा, पीओेजेेके में जैश—लश्कर ने सरेआम निकाली तालिबान की जीत की रैली

WebdeskAug 24, 2021, 12:00 AM IST

फिर उजागर हुआ पाकिस्तान का जिहादी चेहरा, पीओेजेेके में जैश—लश्कर ने सरेआम निकाली तालिबान की जीत की रैली
तालिबान समर्थकों की रैली में जमा भीड़

 

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गनी सहित कई बड़े नेता सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान द्वारा तालिबान को खाद—पानी ही नहीं, आतंकियों की मदद देने का आरोप लगा चुके हैं



वेब डेस्क
पाकिस्तान, अफगानिस्तान प्रकरण में अपना दामन साफ दिखाने की जितनी ज्यादा कोशिश कर रहा है उतना ही उसका जिहादी शैतानी चेहरा दुनिया के सामने उजागर होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण है पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू—कश्मीर में खूंखार आतंकी संगठनों, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा कल यानी 23 अगस्त को तालिबान की जीत के जश्न में निकाली गई रैली।

इससे पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके कई मंत्री खुलेआम तालिबान का पक्ष लेते आए हैं, कई विवादास्पद बयान दिये हैं। अफगानिस्तान के कई बड़े नेता सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान द्वारा तालिबान को खाद—पानी ही नहीं, आतंकियों की मदद देने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन पीओजेके में आतंकी गुटों का यूं सरेआम हथियारों से गोलियां दागते हुए तालिबान के समर्थन में रैली निकालने की हरकत ने पाकिस्तानी हुकूमत और फौज की जिहादी मंशा एक बार फिर सबके सामने उजागर की है। दुनिया के तमाम देशों में इस घटना की तीखे शब्दों में निंदा की जा रही है।

तालिबान के समर्थकों की तरफ से पीओजेके में आयोजित की गई इस रैली के अनेक वीडियो सोशल साइट्स पर दिखाई दिए हैं। इनमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के जिहादी रैली में शामिल ही नहीं, बल्कि हवा में गोलियां दागते भी दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, रैली के अंत में दोनों जिहादी गुटों के सरगनाओं ने लोगों के सामने भाषण दिए।

तालिबान के समर्थकों की तरफ से पीओजेके में आयोजित की गई इस रैली के अनेक वीडियो सोशल साइट्स पर दिखाई दिए हैं। इनमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के जिहादी रैली में शामिल ही नहीं बल्कि हवा में गोलियां दागते देखे जा सकते हैं। खबरों के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान की फतह की खुशी में पाकिस्तान में जश्न मनाया गया। उल्लेखनीय है कि इस रैली का किसी भी पक्ष की तरफ से विरोध तक नहीं किया गया।

इतना ही नहीं, रैली के अंत में दोनों जिहादी गुटों के सरगनाओं ने लोगों के सामने भाषण दिए। इससे पहले तालिबानी सरगना मुल्ला बरादर और आईएसआई चीफ फैज हमीद की एक ही कमरे में साथ—साथ नमाज पढ़ते हुए कई फोटो भी सोशल मीडिया में देखने में आई थीं। यानी साफ है कि तालिबान और आईएसआई का गहरा नाता है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके कई मंत्री बयान दे चुके हैं कि 'तालिबानी खराब इंसान नहीं हैं। वे तो बस इस्लामी मूल्यों पर अफगानिस्तान में सत्ता चलाने की कोशिश कर रहे हैं'। पाकिस्तान के स्कूलों में सरकार की ओर से कथित तालिबान की शान में गीत गवाए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं। 
 

Comments
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Anonymous
on Aug 25 2021 06:35:08

यह भुलना नहीं चाहिए अब्दुल गनी जेएनयू का छात्र था। अफगानिस्तान हो पाकिस्तान भारत बांग्लादेश शुरु से ही चीन रशिया प्रभावित क्षेत्र है। बंगाल से भारतीय पासपोर्ट लेकर अफगानिस्तान जाने वाले गुप्तचरी करते है चीन रशिया के लिए शादी करके अफगानिस्तान चले जाते है अंत मे मौत

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