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विश्व

सुरक्षा परिषद से बाहर रखने से चिढ़ा पाकिस्तान, भारत के विरुद्ध कुरैशी का बेसुरा राग

WebdeskAug 17, 2021, 02:36 PM IST

सुरक्षा परिषद से बाहर रखने से चिढ़ा पाकिस्तान, भारत के विरुद्ध कुरैशी का बेसुरा राग
शाह महमूद कुरैशी (प्रकोष्ठ में) का ट्वीट


भारत का पड़ेासी मजहबी देश कट्टर तालिबान को उकसाता आ रहा है। उसने अफगानिस्तान में उसकी संभावित सरकार को संकेत में अपनी सहमति दे दी है। लेकिन ऐसे में उसे सुरक्षा परिषद की बैठक में न बुलाए जाने से चिढ़े पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ट्वीट करके अपनी भड़ास निकाली है



पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर अपनी हरकतों से मुंह की खानी पड़ी है। 16 अगस्त को अफगानिस्तान पर हुई इस विशेष बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आरोप लगाया कि 'आज अफगानिस्तान को लेकर हुई यूएनएससी की बैठक में एक बार फिर पाकिस्तान को बोलने का मौका नहीं दिया गया। अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने एकतरफा रवैया अपनाया और बाधा डाली'।
 
बैठक की अध्यक्षता कर रहे भारत ने यूएनएससी की बैठक में पाकिस्तान को नहीं बुलाया था। कुरैशी की भड़ास इसी वजह से निकली। पाकिस्तान ने तो यहां तक कह दिया कि संयुक्त राष्ट्र के मंच को भारत अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान के इस ताजा बेसुरे राग की वजह उसकी इस बात से चिढ़ है कि उसे अफगानिस्तान के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में नहीं बुलाया गया, जबकि पाकिस्तान खुद को अफगानिस्तान का ठेकेदार मानता है। बुरी तरह खीझे पाकिस्तान ने कहा कि उसे एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में बोलने नहीं दिया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसी भड़ास को एक ट्वीट के माध्यम से निकाला।


पाकिस्तान के इस ताजा बेसुरे राग की वजह उसकी इस बात से चिढ़ है कि उसे अफगानिस्तान के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में नहीं बुलाया गया, जबकि पाकिस्तान खुद को अफगानिस्तान का ठेकेदार मानता है।


सुरक्षा परिषद की बैठक से बाहर रहे पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने अलग से एक प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें उनसे यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान वहां तालिबान सरकार को मान्यता देगा, अकरम ने कहा कि तालिबान ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे सभी लोगों को साथ लेकर सरकार बनाएंगे। सरकार में सभी गुटों का प्रतिनिधित्व होगा। तालिबान के साथ काम कर रहे हैं हम और इसलिए हमने गैर पश्तून अफगानी नेताओं को बात करने के लिए इस्लामाबाद बुलाया है। ये सभी नेता तालिबान के साथ सहयोग करने पर राजी हैं।

हालांकि पाकिस्तान सरकार तालिबान की बनने वाली सरकार को अपनी सहमति का साफ संकेत दे चुकी है।

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