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विहिप की मांग : अवैध कन्वर्जन के विरुद्ध केंद्र सरकार कानून बनाए

WebdeskJul 19, 2021, 11:58 AM IST

विहिप की मांग : अवैध कन्वर्जन के विरुद्ध केंद्र सरकार कानून बनाए

18 जुलाई को फरीदाबाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री आलोक कुमार (मध्य में)। साथ में हैं (बाएं से) श्री विजय शंकर तिवारी और श्री रमेश गुप्ता


फरीदाबाद में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद की दो दिवसीय बैठक में अवैध कन्वर्जन पर विशेष चर्चा हुई। विहिप ने इसे राष्ट्रीय अभिशाप बताते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि इस अभिशाप से मुक्ति के लिए जल्दी से जल्दी एक कानून बनाया जाए।

गत 17 और 18 जुलाई को फरीदाबाद में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की केन्द्रीय प्रबंध समिति और प्रन्यासी मण्डल की दो दिवसीय बैठक आयोजित हुई। इसमें विहिप के अध्यक्ष श्री विष्णु सदाशिव कोकजे ने पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद यह जिम्मेदारी पद्मश्री डॉ. रवीन्द्र नारायण सिंह को दी गई। इसके साथ ही संयुक्त महामंत्री के पद पर श्री बजरंगलाल बांगड़ा का मनोनयन किया गया। इस तरह अब डॉ. सुरेन्द्र जैन के साथ दो संयुक्त महामंत्री हो गए हैं। श्री चंपत राय के साथ ही श्री जीवेश्वर मिश्र, डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने, श्री ओमप्रकाश सिंहल, श्री गंगराजू, श्री हुकमचंद सांवला, श्री सुशील सराफ और श्री रमेश जैन उपाध्यक्ष के नाते कार्य करते रहेंगे।

18 जुलाई को बैठक की विस्तृत जानकारी देते हुए विहिप के कार्याध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से रक्षा और उसके विरुद्ध युद्ध का आगाज इस बैठक में हुआ है। हम देशभर की हिन्दू शक्तियों के साथ मिलकर भारत के 1,00,000 से अधिक गांवों एवं शहरी बस्तियों में व्यापक जन-जागरण कर न सिर्फ लोगों को इससे बचाव के प्रति जागरुक करेंगे, अपितु पीड़ित परिवारों की हर सम्भव मदद भी करेंगे। इस महामारी द्वारा इस बार बच्चों को विशेष निशाना बनाए जाने की सम्भावना को देखते हुए हम महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं। संकट के समय पर अकेली सरकार ही नहीं, सम्पूर्ण समाज जुटता है, तभी उससे मुक्ति मिलती है।

उन्होंने कहा कि अवैध कन्वर्जन एक राष्ट्रीय अभिशाप है, जिससे मुक्ति मिलनी ही चाहिए। इस पर रोक हेतु 11 राज्यों में तो कानून हैं किन्तु समस्या व षड्यंत्र राष्ट्रव्यापी हैं। इसलिए हमारी इस अन्तरराष्ट्रीय बैठक का सर्व-सम्मत मत है कि इसके लिए केन्द्रीय कानून बनना ही चाहिए, तभी इस अभिशाप से मुक्ति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों और वर्तमान परिस्थितियों से भी यह स्पष्ट हो चुका है कि केन्द्र सरकार को इस बारे में और विलम्ब नहीं करना चाहिए। हमने हिन्दू समाज से भी आह्वान किया है कि मुल्ला-मिशनरियों के भारत विरोधी और हिन्दू—द्रोही षड्यंत्रों पर सजग निगाहें रखकर सभी संविधान—सम्मत उपायों के माध्यम से इन पर रोक लगाए।

श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि बैठक में देशभर के मठ-मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण से मुक्ति हेतु भी एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि मठ-मंदिर न केवल आस्था अपितु, चिरंजीवी शक्ति के केन्द्र व हिन्दू समाज की आत्मा हैं। इन्हें सरकारी नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता। समाज को स्वयं इनकी देख-भाल और संचालन का दायित्व सौंपना चाहिए। चिदम्बरम् नटराज मंदिर मामले सहित कई बार न्यायपालिका ने भी कहा है कि सरकारों को मंदिरों के नियंत्रण का कोई अधिकार नहीं है इसलिए विश्व भर से जुड़े विहिप कार्यकर्ताओं ने एक स्वर से अपील करते हुए केन्द्र सरकार से कहा है कि इस हेतु भी एक केन्द्रीय कानून बनाकर मठ-मंदिरों व धार्मिक संस्थाओं को सरकार नियंत्रण से मुक्ति दिलाकर हिन्दू समाज को सौंपा जाए, ताकि संत और भक्त इनकी धार्मिक व प्रशासनिक व्यवस्थायें वहां की समाजोन्मुखी व संस्कारक्षम परम्पराओं को पुनः स्थापित कर सकें।

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Comments
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Anonymous
on Jul 21 2021 21:51:37

bjp jab sarkar me tab common civil codko bat kartethe ab kuchh nahi bolte bjp ka khavvana chavava na dat alag

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