संस्कृति

कलाकारों की मदद के लिए "पीर पराई जाणे रे" का आयोजन

WebdeskJul 12, 2021, 04:37 PM IST

कलाकारों की मदद के लिए "पीर पराई जाणे रे"  का आयोजन

कोरोना के कारण अभाव का जीवन जीने वाले कलाकारों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए संस्कार भारती ने "पीर पराई जाणे रे"  का किया आयोजन। आने वाले दिनों में सरकार एवं समाज से आर्थिक सहयोग प्राप्त कर ऐसे कलाकारों को मदद पहुंचाई जाएगी, जो संकट का सामना कर रहे हैं।



कोरोना महामारी ने समाज के हर तबके पर असर डाला है। कला जगत भी इससे अछूता नहीं रहा। कलाकार, विशेष रूप से छोटे कलाकार इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सार्वजनिक कार्यक्रम प्रतिबंधित होने के कारण कला की मंचीय प्रस्तुतियां बंद हैं। ऐसे में कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। कला-साहित्य, संस्कृति की संवाहिका है और संस्कृति राष्ट्र की आत्मा। कला भविष्य में आने वाले संकटों से सामना करने हेतु समाज को तैयार करती है। लेकिन जब 'कलाओं' पर ही संकट के बादल मंडराने लगे तो समाज का संकट में घिरना अवश्यम्भावी है। ऐसे में जरूरतमंद कलाकारों की आर्थिक सहायता के लिए संस्कार भारती दिल्ली प्रान्त द्वारा 'पीर पराई जाणे रे' नाम से एक आयोजन किया गया। इसमें मशहूर कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अभावग्रस्त कलाकारों की मदद के लिए समाज से अपील की। आनलाइन आयोजित हुए इस कार्यक्रम में सोनू निगम, शंकर महादेवन, उस्ताद अमजद अली खां, उस्ताद वसिफुद्दीन डागर, सुरेश वाडकर, हंसराज हंस, पंडित बिरजू महाराज, अनूप जलोटा, कैलाश खेर, अनुराधा पौडवाल, मनोज तिवारी, सरोजा वैद्यनाथन, दिलेर मेंहदी, मिका सिंह, अनुपम खेर, सोनल मानसिंह, कपिल शर्मा, प्रकाश झा, डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम, डॉ. सोनल मानसिंह, नागराज हवलदार, जानू बरूआ, सुमित्रा गुहा, सुभाष घई, अक्षय कुमार, रवि किशन, जसवीर जस्सी, मधुभट्ट तैलंग, राजेन्द्र गंगानी, अनवर खान मांगणियार, मुकुंद नायक, हरिहरन, साजन मिश्रा, विश्वमोहन भट्ट, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, वासुदेव कामत, चेतन जोशी, ऋचा शर्मा सरीखे कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं और अभावग्रस्त कलाकारों की सहायता की अपील की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं सांसद हंसराज हंस ने बताया कि हम चाहते हैं कि दूर-दराज के छोटे कलाकारों तक मदद पहुंचे। इस कार्यक्रम में एवं आगे भी संस्कार भारती कला के उन्नयन और कलाकारों की सहायता के लिए पहल करेगी।
Follow Us on Telegram
 

Comments

Also read: विधि शासित राजपद व उसकी शास्त्रोक्त मर्यादाएं ..

Stan Swamy की कब, कैसे और क्यों हुई मौत....हकीकत जानें| Reason Behind Stan Swamy Death | Latest News

Stan Swamy की कब, कैसे और क्यों हुई मौत....हकीकत जानें| Reason Behind Stan Swamy Death | Latest News Stan Swamy की मौत पर आखिर बवाल क्यों ? कौन थे स्टेन स्वामी और उनकी पर पर मीडिया का एक दल और कांग्रेस, वामपंथी समेत कई विपक्षी दल सरकार को क्यों घेर रहे हैं. उस स्टेन स्वामी की जरा हकीकत भी जान लें. #Panchjanya #StanSwamy #StanDeathCase...

Also read: शूद्रवर्ग राष्ट्र की समृद्धि का आधार ..

लोकमंगल के लिए लोकजागरण कर रही है ‘लोकभारती’
संस्कृति संवाद : सार्वभौम राष्ट्र व शासन पद्धतियों की वैदिक अवधारणा

संस्कृति संवाद : राजपद पर निर्वाचन के वैदिक मानदण्ड

प्रो. भगवती प्रकाश वैदिक काल में राजा या राष्ट्र प्रमुख का निर्वाचन योग्यता के आधार पर होता था, इस निर्वाचन में जाति या स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं था। इसके साथ ही राजा की भूमिका और कर्तव्य भी तय होते थे और वह परिषद के निर्णय मानने को बाध्य होता था वैदिक काल से सूत्र ग्रन्थों की रचना होने तक राजा का पद योग्यता आधारित एवं जाति निरपेक्ष होने के पर्याप्त विवेचन मिलते हैं। राजा या राष्ट्र प्रमुख के चुनाव, राज्यकर्ता पर निर्वाचित स्वायत्त संस्थाओं के नियन्त्रण, राज्य के निर्णयों में स्वायत्त ...

संस्कृति संवाद : राजपद पर निर्वाचन के वैदिक मानदण्ड