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अफगानिस्तान आशंकाओं की आहट

WebdeskAug 22, 2021, 09:50 AM IST

अफगानिस्तान आशंकाओं की आहट

काबुल के एयरपोर्ट पर कतर जा रहे अमेरीकी विमान में बैठे अफगानिस्तानी or पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी


पाञ्चजन्य ब्यूरो
 
अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद घटनाएं जिस तरह घट रही हैं, वे कई तरह की आशंकाओं को जन्म देती हैं। स्त्रियों के साथ जो घिनौना व्यवहार हो रहा है, क्या वही इस्लामी राज है? तालिबानियों का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना, दुनिया से बड़े-बड़े वादे करना और अगले दिन से ही उन वादों के विपरीत आचरण करना उस विश्वास को हिला देता है जिसकी बिना पर किन्ही दो व्यक्तियों, समूहों या देशों के बीच संवाद शुरू हो सकता है
 
 

अफगानिस्तान पर 15 अगस्त, 2021 को एक बार फिर तालिबान का राज कायम हो गया। तालिबान के काबुल में प्रवेश करते ही कब्जा होने से पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी अपने 51 करीबियों के साथ देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात चले गए। तालिबान ने अफगानिस्तान को ‘इस्लामिक अमीरात आॅफ अफगानिस्तान’ घोषित कर दिया है और शरिया कानून लागू कर दिया है।
 
तालिबान का राज कायम होने के साथ ही अफगानिस्तान में अफरातफरी और बदहवासी का माहौल है। लोग घर छोड़कर किसी अन्य देश को भागने में लगे हुए हैं। महिलाएं अपने छोटे बच्चों को एयरपोर्ट पर अफगानों को अमेरिकी-ब्रिटिश सैनिकों से अलग करने के लिए लगाए गए कंटीले तारों के उस पार उछाल रही हैं कि सैनिक उन बच्चों को बचा ले जाएंगे। काबुल एयरपोर्ट पर अफगानियों को रोकने के लिए तालिबानी लड़ाकों ने फायरिंग की। 19 अगस्त को अफगानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर अफगानी झंडा फहराने वालों पर फायरिंग की गई। 20 वर्ष पहले अमेरिकी सेना की मदद करने वालों की तलाश की जा रही है और मौत के घाट उतारा जा रहा है। क्या कोई सभ्य समाज इस हिंसा और इस्लामी उन्माद को जायज ठहरा सकता है। क्या काबुल में तालिबानों द्वारा की जा रही हरकतें ही इस्लाम है? अगर है तो अफगानी इस इस्लाम को क्यों स्वीकार नहीं कर रहे और किसी भी स्थिति में इस इस्लामी राज की पकड़ से बचकर क्यों भाग रहे हैं।
 
तालिबानी जिहादी कमांडर निकाह करने और यौनगुलाम बनाने के लिए शहरों के विभिन्न इमामों से वहां की 12 साल से लेकर 45 साल तक की लड़कियों/ औरतों की सूची मांग रहे हैं। औरतों के पुरुष साथी के बिना और बुर्का पहने बगैर घरों से निकलने पर रोक लगाने के साथ उनके दुकानें खोलने, बैंकों में काम करने आदि पर पाबंदी लगा दी गई है। यह इस्लामी राज में स्त्रियों की स्थिति है। प्रगतिशील ताकतें इस पर खामोश हैं। आखिरकार तालिबानी शासन में स्त्रियों का क्या होगा, मौजूदा हालात तो महज आशंकाएं ही उत्पन्न करते हैं।
 
तालिबान एक ओर अफगानियों को सुरक्षा और आम माफी का वादा कर रहा है, दूसरी तरफ हवाईजहाज पकड़ने के लिए जाते अफगानियों पर फायरिंग कर रहा है। समर्पण करने वाले लोगों की हत्याएं की जा रही हैं। वह महिलाओं से बेहतर व्यवहार की बातें कर रहा है तो दूसरी ओर महिलाओं-लड़कियों को अगवा कर उन्हें यौन गुलाम भी बना रहा है। भारत के लिए वह एक ओर बेहतर संबंध की बात करता है, दूसरी ओर भारत से आयात-निर्यात पर रोक लगा देता है। इससे अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार के बारे में आशंकाएं पैदा होती हैं।
 
हैरत इस बात की है कि मानवाधिकार, स्त्री स्वतंत्रता और अधिकार, शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्य जैसे विषयों पर ललकारने वाले लिबरल समूह इस वक्त शुरुआत में खामोश रहे। बाद में उन्होंने विमर्श का केंद्र अफगानियों के विरुद्ध हो रही बर्बरता से हटाकर अफगानिस्तान की अमेरिका से स्वतंत्रता की ओर मोड़ दिया। लिबरल समूह इस घटनाक्रम को स्वतंत्रता के लिए जद्दोजहद करने वाले लोगों की जीत बताकर तालिबानी बर्बरता और इस्लामी उन्माद को जायज ठहराने में जुटा हुआ है। अफगानी स्त्रियों और बच्चों का आर्तनाद उन तक नहीं पहुंच रहा।
 
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अफगानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर अफगानिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर तालिबानियों ने निहत्थी जनता पर फायरिंग की।
 
इस समूह का दोमुंहापन इस बात से भी जाहिर होता है कि एक तरफ वे अमेरिकी फौज से अफगानिस्तान को ‘आजाद’ कराने के लिए तालिबान की सराहना में जुटे हैं तो दूसरी तरफ, अफगानी जनता पर तालिबानी हिंसा के लिए भी वे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराने से नहीं चूकते कि अमेरिका ने समय से पूर्व अपने सैनिकों को वापस बुला लिया, जिससे अफगानिस्तान की सड़कों पर यह अराजक स्थिति है। वे तालिबानी प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रगतिशीलता का परिचायक घोषित करते हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला रिपोर्टरों के हिजाब पहनने और टीवी एंकर के रूप में महिलाओं पर रोक लगाए जाने पर चयनित चुप्पी ओढ़ लेते हैं। कुल मिलाकर अफगानिस्तान में इस्लाम के नाम पर अराजकता, हिंसा, उन्माद और बर्बरता का खुलेआम प्रदर्शन हो रहा है। मानवता कराह रही है।
 
भारत से आयात-निर्यात पर रोक
अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने कहा था कि भारत को अफगानिस्तान में अपने काम से पीछे हटने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय परियोजनाओं में कोई बाधा नहीं आएगी। लेकिन तालिबान ने सत्ता पर काबिज होते ही भारत के साथ आयात और निर्यात, दोनों को बंद कर दिया है। फेडरेशन आॅफ इंडिया एक्सपोर्ट आॅर्गनाइजेशन के डॉ. अजय सहाय ने इस बात की पुष्टि की है। 2021 में भारत का निर्यात 835 मिलियन डॉलर का है, जबकि आयात 510 मिलियन डॉलर है।
 
भारत चीनी, चाय, कॉफी, मसालों समेत अन्य चीजें निर्यात करता है, जबकि ड्राई फ्रूट्स, प्याज वगैरह बड़े स्तर पर आयात किए जाते हैं। ऐसे आने वाले दिनों मे सूखे मेवों के दाम बढ़ सकते हैं। भारत द्वारा अफगानिस्तान में बड़े स्तर पर निवेश भी किया गया है, जिसमें करीब 400 योजनाओं में 3 बिलियन डॉलर का निवेश है।
 
 
 

 

तालिबानी आहटें
14 अप्रैल, 2021: अमेरिका की सैन्य वापसी की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 1 मई से अमेरिकी फौजों की अफगानिस्तान से स्वदेश वापसी शुरू होने और 31 अगस्त तक पूरी हो जाने की घोषणा की।
4 मई, 2021 : तालिबान के हमले शुरू
अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू होते ही आतंकी संगठन तालिबान ने अफगानिस्तान की सरकारी फौज के खिलाफ दक्षिणी हेलमंद प्रांत समेत छह प्रांतों में सैन्य अभियान शुरू किया।
11 जून, 2021 : नेर्ख पर कब्जा
अफगान सरकार के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत करते ही तालिबान ने काबुल के नजदीक नेर्ख जिले पर कब्जा कर लिया। इसी वक्त कई जगहों पर भारी जंग जारी थी।
22 जून, 2021: पहली चेतावनी
अफगानिस्तान में तालिबान लगातार पांव पसार रहा था। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत ने कहा कि तालिबान ने 370 में से 50 जिलों पर कब्जा कर लिया है।
2 जुलाई : खाली हुआ बगराम
अमेरिकी सेना ने चुपचुचाप रातोंरात बगराम हवाईअड्डे को खाली कर दिया जो प्रभावी तौर पर अफगानिस्तान में युद्ध से अमेरिका के हटने का प्रतीक था। अब तालिबान और अधिक अक्रामक हो गया।
5 जुलाई 2021 : हर ओर जीत
अफगानिस्तान में तालिबान का एक के बाद एक अन्य शहरों पर कब्जा होता गया। तालिबान ने कहा कि वे अगस्त की शुरुआत से पहले अफगान सरकार को एक लिखित शांति प्रस्ताव भेज सकते हैं।
6 अगस्त : जरांज पर कब्जा
तालिबान ने दक्षिण में ईरान से लगती सीमा पर स्थित निमरूज प्रांत की राजधानी जरांज पर कब्जा कर लिया जो सालों बाद उसके कब्जे में आई पहली प्रांतीय राजधानी थी। इसके बाद कब्जे का सिलसिला शुरू हो गया।
13 अगस्त : कंधार पर कब्जा
तालिबान ने अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही पश्चिम में हेरात भी अफगान सेना के हाथ से चला गया।
14 अगस्त : जलालाबाद पर कब्जा
उत्तर के सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर तालिबानी झंडा फहरा। तालिबान के लड़ाके काबुल की ओर बढ़ रहे थे और जलालाबाद में उनका कोई विरोध नहीं हुआ और आसानी से कब्जा हो गया।
15 अगस्त : काबुल फतह
तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में प्रवेश कर लिया। काबुल फतह करते ही अफगानिस्तान में तालिबान का राज शुरू हो गया। काबुल में तालिबानियों की एंट्री के साथ ही राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के कर्मचारी भी काबुल से निकल गए और तालिबान के कमांडर राष्ट्रपति भवन में घुस गए।
 
 
 
 

 

दिल में शरिया, जुबान पर लोकतंत्र
अफगानिस्तान में विचित्र दशा है। शरिया कानून लागू होने की आहट सुन भगदड़ मची हुई है। एक अफगानी नागरिक तो हवाई जहाज का पहिया पकड़ कर लटक गया। हवाई जहाज के उड़ते ही वह गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई। मुसलमान ही मुसलमान को मार रहे हैं। शरिया कानून का हश्र पूरी दुनिया देख रही है मगर हिन्दुस्थान में कुछ ऐसे लोग हैं जो बात तो लोकतंत्र की करते हैं मगर उनके ह्रदय में शरिया कानून बसता है। मुसलमानों की अफगानिस्तान में दुर्दशा के बावजूद ऐसे लोग तालिबान की प्रशंसा करने से बाज नहीं आ रहे।
उत्तर प्रदेश के संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान ने कहा कि ‘अफगानिस्तान में अमेरिका की बादशाहत क्यों? तालिबान, अफगानिस्तान की ताकत है। तालिबान ने वहां पर रूस और अमेरिका को टिकने नहीं दिया। तालिबान के नेतृत्व में अफगान के लोग आजादी चाहते हैं। तालिबान, अफगानिस्तान को आजाद करके उसे अपने अनुसार चलाना चाहता है।’
पीस पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने तालिबान को शुभकामनाएं देते हुए ट्वीट किया। तालिबान ने शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता प्राप्त की। आशा है कि वह एहकाम-ए-इलाही निजाम-ए-मुस्तफा का राज कायम करेंगे, जिसमें किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं होगा। सबको न्याय मिलेगा। हम शांति और न्याय के पक्षधर हैं।
उधर आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सज्जाद नोमानी ने तालिबान की जीत का स्वागत करते हुए उसे सलाम किया। सज्जाद नोमानी ने बाकायदा एक वीडियो संदेश जारी कर कहा ‘15 अगस्त का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है। अफगानिस्तान में तालिबान ने बिना हथियारों और बिना किसी विज्ञान के दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को मात दी। उन लोगों ने काबुल के राष्ट्रपति भवन में जिस तरह से एंट्री ली, उसमें किसी भी तरह का गुरूर नहीं दिखा। वे नौजवान काबुल की सरजमीं को चूमते दिखे और खुदा का शुक्र अदा किया।’
नोमानी ने कहा कि - जो कौम मरने के लिए तैयार हो जाए, उसे दुनिया में कोई शिकस्त नहीं दे सकता। दूर बैठा एक मुसलमान आपको सलाम करता है। यह पूरी दुनिया ने देख लिया कि आपने लोगों को गले लगा लिया और आम माफी का ऐलान कर दिया। पूरे मुल्क में महिलाओं से किसी भी तरह की बदसलूकी का कोई वाकया नहीं आया जबकि आप पर इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। इसके बाद अगले ही दिन बाजार खुल गए और बच्चियां स्कूल जाती नजर आ रही हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि अब पूरी एशिया में अमन फैलेगा।’’
नोमानी के इस बयान के बाद आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की काफी आलोचना हुई। उसके बाद बोर्ड की ओर से ट्वीट करके कहा गया कि बोर्ड ने अफगानिस्तान और तालिबान की राजनीतिक स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कुछ सदस्यों की निजी राय से बोर्ड का कोई वास्ता - सरोकार नहीं है।
उधर जनपद संभल में सपा सांसद शफीकुर्रहमान के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ तहरीर दी गई कि उन्होंने तालिबान का समर्थन किया है और तालिबान की तुलना भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से की। इस प्रकार के विवादित बयान के कारण तहरीर में राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाया गया। तहरीर के आधार पर राष्ट्रद्रोह की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
 
 
 
 

 

तालिबान ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए ये वादे
अफगानिस्तान पर पूरी तरह कब्जा करने के बाद तालिबान ने 17 अगस्त को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने महिलाओं के अधिकार, दुनिया से तालिबान के संबंधों सहित कई सवालों के जवाब दिए।
  • अफगान युद्ध समाप्त हो चुका है। बीते वक्त में जिसने भी तालिबान के खिलाफ युद्ध लड़ा, हम उसे माफ करते हैं। किसी व्यक्ति या देश से बदला लेने का इरादा नहीं है
  • अफगानिस्तान के निवासियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा
  • अफगानिस्तान में कोई किसी को अगवा नहीं कर सकेगा। कोई किसी की जान नहीं ले सकेगा
  •  महिलाओं को शरिया कानून के तहत अधिकार और आजादी दी जाएगी। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र और स्कूलों में काम करने की इजाजत होगी
  • जब तालिबान सरकार बन जाएगी, तब यह स्पष्ट होगा कि शरिया कानून के हिसाब से महिलाओं को क्या-क्या छूट मिलेगी
  •  हम सभी देशों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि हमारे बल सभी दूतावासों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सहायता एजेंसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूद हैं
  • आतंकियों को किसी भी देश के खिलाफ साजिश रचने या हमला करने में अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं करने देंगे।
  • तालिबान की प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाने की है। इसके बाद लोग शांति से रह सकेंगे
  • तालिबान के राज में देश की अर्थव्यवस्था और लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा
  •  हम अफगानिस्तान के मूल्यों का ख्याल करने वाले प्राइवेट मीडिया को स्वतंत्र रूप से काम करने देंगे।

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